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Friday, 1 August 2014

दूरदर्शिता


अनेकों आहुतियां और बलिदान
कठिन परिश्रम और अत्यंत आलोचनाओं का शिकार
सोने की चिड़िया कही जाने वाली
भारत भूमि की
क्या यही कल्पना की होगी उन्होंने?
स्वतंत्रता सेनानिओं या राष्ट्रपिता बापू ने?

Monday, 28 July 2014

"दहेज अभिशाप है"


"दहेज अभिशाप है"
 पंक्ति प्रभावशाली है
 चरित्र में नहीं तो चलिए
 विज्ञापन ही सही
 दहेज- या काहिए
 वर दक्षिणा
कलंक हमारे समाज पर


Wednesday, 16 July 2014

धरती- असंतुलन की ओर अग्रसर


फ़ेंक रहे हैं,
उड़ा रहे हैं
बस फैलाए जा रहे हैं
बगैर परवाह करे संतुलन की
जो बदल रहा है
बिगड़ रहा है

Wednesday, 11 June 2014

मनुष्य और प्रकृति


नर से नारायण हो
या फ़िर
नारायण से नर 
है दिवास्वप्न ये क्या

सामर्थ बेशक होगा तुझमें
पत्थर को पिघलाने का

Wednesday, 21 May 2014

युवा जागरण


युवा है तो वायु बन,
जीत जा जीवन का रण ।
बेशक जोश से तू कम कर ,
पर स्व-विवेक का भी तो ध्यान रख ।

Monday, 19 May 2014

एक धीमा जहर

समय व लोग ,
सभी साक्षी हैं
अनेकों जीवन नष्ट हुए हैं 
तो कई पच्छतावे में
जी रहें हैं .!
फिर भी नशा.. आकर्षण रहा है युवाओं का

Sunday, 18 May 2014

भ्रष्टाचार

        भारत की धरती पर 
         सबसे बड़ा कलंक 
       भ्रष्टाचार हमारे देश का 
        सबसे बड़ा आतंक 
        हर नए सवेरे के साथ हममे   
      भ्रष्टाचार रोकने को अंतर्द्वंद 
      फिर भी भ्रष्टाचार हमारे देश का  

Saturday, 17 May 2014

विकल्प नहीं संकल्प कीजिये


 सिहर रही सारी मानवता 
 धरती पर है भव दानवता 
 निर्मल उज्वल श्यामल धरती,
 हर दम यही पुकार है करती
 इतना पापी न बन ऐ मानव
 इंसान बन ना बन दानव 

Thursday, 15 May 2014

एक दरिया

चली थी जब वो दुनिया नापने, 
पता न था एक दरिया होगा 
राह में, जिसको पार करना 
बिलकुल भी आसान न होगा.

दर्द थे उसमे भरे पड़े,
खतरे भी थे बड़े बड़े


Sunday, 11 May 2014

प्रयास है छोटा सा

                                                  
प्रयास है छोटा सा 
 एक छोटी सी कोशिश बदलाव की ... 
उम्मीद की लौ भी हलकी है जानते हैं .. 
फिर भी कोशिश है इस समय के विद्वानो को जगाने की
कुछ  समानताओं  से  अवगत  कराने  की ..
अहम  की  पट्टी  हटा  कर